सोलर इंडस्ट्री में HJT यानी Heterojunction Solar Cells को लंबे समय से हाई-एफिशिएंसी और लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस के लिए जाना जाता है लेकिन हाल ही में फ्रांस के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कारण खोज निकाला है जिसने इस टेक्नोलॉजी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रिसर्च में सामने आया कि UV यानी अल्ट्रावायलेट रोशनी के संपर्क में आने पर HJT सेल्स की परफॉर्मेंस कुछ मामलों में 63% तक गिर सकती है। यह गिरावट सिर्फ सामान्य डिग्रेडेशन नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक जटिल वैज्ञानिक प्रक्रिया काम कर रही है, जिसे अब पहली बार साफ-साफ समझा गया है।

UV रोशनी कैसे HJT Solar Cells को अंदर से नुकसान पहुंचाती है
फ्रांस के CEA-Liten रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया कि HJT सोलर सेल्स में UV-Induced Degradation का मुख्य कारण हाइड्रोजन का माइग्रेशन है। HJT सेल्स में इस्तेमाल होने वाली hydrogenated amorphous silicon यानी a-Si:H लेयर्स UV रोशनी के प्रति बेहद संवेदनशील पाई गईं। पहले माना जाता था कि UV फोटॉन्स केवल Si–H बॉन्ड तोड़ते हैं, जिससे केमिकल पैसिवेशन कमजोर होता है लेकिन नई स्टडी ने दिखाया कि असली समस्या इससे कहीं ज्यादा गहरी है।
जब UV किरणें डोप्ड सिलेक्टिव लेयर्स पर पड़ती हैं तो हाइड्रोजन परमाणु अपनी जगह छोड़कर दूसरी जगह माइग्रेट करने लगते हैं। यह माइग्रेशन फ्री-कैरियर डेंसिटी और डोपिंग लेवल पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है। खास तौर पर फ्रंट n-type सिलेक्टिव लेयर में इस्तेमाल होने वाला फॉस्फीन गैस यानी PH₃ इस पूरी प्रक्रिया को काफी हद तक कंट्रोल करता है। ज्यादा PH₃ फ्लो के साथ बने HJT सेल्स में UV एक्सपोजर के बाद कैरियर लाइफटाइम में भारी गिरावट देखी गई।
63% तक परफॉर्मेंस गिरने का असली वैज्ञानिक कारण
रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने कंट्रोल्ड UVA और UVB एक्सपोजर का इस्तेमाल किया ताकि रियल-वर्ल्ड मॉड्यूल कंडीशंस को सही तरीके से दोहराया जा सके। नतीजे बेहद चौंकाने वाले थे। जिन HJT वेफर्स में अमोर्फस फ्रंट लेयर को हाई PH₃ फ्लो के साथ प्रोसेस किया गया था, उनमें सिर्फ 60 kWh/m² UVA एक्सपोजर के बाद कैरियर लाइफटाइम में 63.3% तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं बिना डोप्ड लेयर्स में यही नुकसान सिर्फ 9.5% के आसपास रहा।
इसका कारण यह पाया गया कि UV की वजह से हाइड्रोजन ऐसे कॉम्प्लेक्स बना लेता है जो इलेक्ट्रॉनिकली इनएक्टिव होते हैं, जैसे P–Si–H–Si स्ट्रक्चर। ये डिफेक्ट्स फील्ड-इफेक्ट पैसिवेशन को कमजोर कर देते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉन्स और होल्स की लाइफटाइम तेजी से घटती है। आसान शब्दों में कहें तो सेल के अंदर चार्ज कैरियर्स सही तरीके से काम नहीं कर पाते और पावर आउटपुट तेजी से गिरने लगता है।
समाधान भी मिला: Light Soaking से परफॉर्मेंस की वापसी
इस रिसर्च की सबसे अच्छी बात यह है कि वैज्ञानिकों ने समस्या का समाधान भी खोज निकाला है। स्टडी में पाया गया कि थर्मल और लाइट एक्टिवेशन को मिलाकर किया गया Light Soaking ट्रीटमेंट HJT सेल्स की कंडक्टिविटी को धीरे-धीरे वापस ला सकता है। इस प्रक्रिया में हाइड्रोजन दोबारा सही बॉन्डिंग कन्फिगरेशन में री-अरेंज होता है, जिससे डोपेंट एक्टिवेशन बेहतर होता है और a-Si:H/c-Si इंटरफेस पर पैसिवेशन काफी हद तक रिस्टोर हो जाता है।
FTIR मापों से यह भी सामने आया कि Light Soaking खास तौर पर उन Si–H बॉन्ड्स को फिर से जनरेट करता है जो डिफेक्ट-प्रोन एरिया में होते हैं। हालांकि वैज्ञानिकों ने यह चेतावनी भी दी है कि एक निश्चित UV डोज के बाद नुकसान पूरी तरह रिवर्सिबल नहीं रहता। इसलिए भविष्य में HJT मॉड्यूल्स के लिए बेहतर UV फिल्टरिंग, मल्टी-लेयर सिलेक्टिव लेयर इंजीनियरिंग और हाइड्रोजन कंटेंट का सटीक कंट्रोल बेहद जरूरी होगा।
कुल मिलाकर यह रिसर्च HJT टेक्नोलॉजी के लिए एक बड़ा सबक है। अगर डोपिंग, हाइड्रोजन बॉन्डिंग और UV प्रोटेक्शन को सही तरीके से मैनेज किया जाए, तो HJT Solar Cells न सिर्फ हाई एफिशिएंसी देंगे बल्कि लंबे समय तक भरोसेमंद परफॉर्मेंस भी बनाए रखेंगे।
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