सिल्वर की महंगाई भी नहीं रोक पाई Waaree Energies को! ब्रोकरेज ने फिर बोला Buy, 33% रिटर्न का दावा

भारत की सोलर इंडस्ट्री में Waaree Energies एक ऐसा नाम बन चुका है जो हर चुनौती के बीच भी निवेशकों का भरोसा जीतता नजर आ रहा है। हाल के महीनों में सिल्वर की कीमतों में तेज उछाल ने सोलर मॉड्यूल निर्माताओं के लिए चिंता जरूर बढ़ाई है, लेकिन इसके बावजूद Waaree Energies की ग्रोथ स्टोरी पर कोई बड़ा असर पड़ता नहीं दिख रहा। यही वजह है कि दिग्गज ब्रोकरेज Motilal Oswal Financial Services (MOFSL) ने कंपनी पर एक बार फिर ‘Buy’ रेटिंग बनाए रखी है और करीब 33 प्रतिशत तक रिटर्न की संभावना जताई है।

Rising Silver Prices Fail to Impact Waaree Energies

सिल्वर की कीमतें बढ़ीं, लेकिन मार्जिन पर सीमित असर

सोलर मॉड्यूल निर्माण में सिल्वर एक अहम कच्चा माल है और इसकी कीमतों में तेजी निवेशकों के लिए स्वाभाविक चिंता का विषय बनती है। हालांकि MOFSL का मानना है कि Waaree Energies के लिए यह जोखिम फिलहाल काफी हद तक कंट्रोल में है। ब्रोकरेज के अनुसार, सिल्वर कंपनी के कुल मॉड्यूल कॉस्ट का 9 प्रतिशत से भी कम हिस्सा है। इसके अलावा Waaree ने पहले से किए गए कॉन्ट्रैक्ट्स, बेहतर यूटिलाइजेशन लेवल और लागत में बेहतर एब्जॉर्प्शन के जरिए इस असर को काफी हद तक कम कर लिया है।

इसके साथ ही DCR (Domestic Content Requirement) मॉड्यूल्स की बिक्री में बढ़ता योगदान भी कंपनी को बेहतर रियलाइजेशन दिला रहा है। क्वार्टर-दर-क्वार्टर सेल प्रोडक्शन में तेज बढ़ोतरी ने Waaree की ऑपरेशनल एफिशिएंसी को और मजबूत किया है। इन सभी फैक्टर्स की वजह से सिल्वर की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद मार्जिन पर बड़ा दबाव नहीं दिख रहा।

शानदार तिमाही नतीजे और मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस

दिसंबर तिमाही में Waaree Energies ने उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। कंपनी का रेवेन्यू 7,570 करोड़ रुपये रहा, जो MOFSL के अनुमान से 16 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं EBITDA में 26 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली जो करीब 25 प्रतिशत के मजबूत मार्जिन के साथ आया। ब्रोकरेज का कहना है कि यह बेहतर प्रदर्शन ऑपरेशनल एफिशिएंसी और फेवरबल प्रोडक्ट मिक्स की वजह से संभव हो पाया।

मॉड्यूल और सेल प्रोडक्शन में भी तिमाही आधार पर क्रमशः 34 प्रतिशत और 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से साफ है कि कंपनी न सिर्फ मांग को पूरा कर पा रही है, बल्कि अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी का भी बेहतर इस्तेमाल कर रही है। यही कारण है कि Waaree Energies अपने FY26 EBITDA गाइडेंस 5,500 से 6,000 करोड़ रुपये से भी आगे निकलने की राह पर नजर आ रही है।

33% अपसाइड का दावा और निवेशकों के लिए क्या मायने

MOFSL ने Waaree Energies के लिए 3,514 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है, जो मौजूदा स्तर से करीब 33 प्रतिशत की तेजी का संकेत देता है। ब्रोकरेज का मानना है कि स्टॉक अभी भी आकर्षक वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। FY28 के अनुमानित EV/EBITDA के आधार पर यह करीब 9.5 गुना पर उपलब्ध है, जिसे लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए एक अच्छा मौका माना जा सकता है।

हालांकि कुछ जोखिम भी मौजूद हैं, जैसे सिल्वर की कीमतों में अस्थिरता, FY26 में टेंडरिंग एक्टिविटी की रफ्तार में सुस्ती और ऑर्डर बुक में घरेलू हिस्सेदारी का करीब 35 प्रतिशत होना। इसके बावजूद, चीन की एक्सपोर्ट सब्सिडी हटने से भारतीय निर्माताओं की ग्लोबल प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ी है, जिसका फायदा Waaree Energies को मिल सकता है। कुल मिलाकर मजबूत फंडामेंटल्स और पॉजिटिव आउटलुक के चलते Waaree Energies निवेशकों के रडार पर बनी हुई है।

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