दुनिया तेजी से स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा की ओर बढ़ रही है और इसी दिशा में चीन के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चीन की नॉर्थवेस्टर्न पॉलिटेक्निकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ऐसी Lithium–Sulfur बैटरी विकसित की है जो न सिर्फ ज्यादा ऊर्जा स्टोर कर सकती है बल्कि सूरज की रोशनी से आंशिक रूप से चार्ज भी हो सकती है। यह तकनीक भविष्य में बिना प्लग के पावर देने वाले एनर्जी सिस्टम का रास्ता खोल सकती है। खास बात यह है कि इस बैटरी में एक खास polymer–TiO₂ लेयर का इस्तेमाल किया गया है, जो लाइट की मदद से बैटरी के अंदर होने वाली केमिकल रिएक्शन को तेज और ज्यादा प्रभावी बनाती है।

Lithium–Sulfur बैटरी क्यों मानी जाती है भविष्य की तकनीक
Lithium–Sulfur बैटरियों को लंबे समय से Lithium-ion बैटरियों का अगला बड़ा विकल्प माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है इसकी बहुत ज्यादा ऊर्जा भंडारण क्षमता, जो मौजूदा Lithium-ion बैटरियों से कहीं अधिक हो सकती है। इसके अलावा सल्फर सस्ता, आसानी से उपलब्ध और पर्यावरण के लिए कम हानिकारक होता है। हालांकि असली समस्या तब आती है जब इन बैटरियों का वास्तविक उपयोग किया जाता है।
सल्फर और उसके इंटरमीडिएट कंपाउंड्स, जिन्हें polysulfides कहा जाता है बैटरी के अंदर धीरे और अक्षम तरीके से रिएक्ट करते हैं। इससे बैटरी की क्षमता कम हो जाती है और चार्ज-डिस्चार्ज साइकल में तेजी से गिरावट आती है। यही वजह है कि इतनी संभावनाओं के बावजूद Lithium–Sulfur बैटरियां अब तक बड़े स्तर पर इस्तेमाल में नहीं आ पाई थीं।
सूरज की रोशनी से कैसे चार्ज होती है यह नई बैटरी
चीन के वैज्ञानिकों ने इस समस्या का समाधान एक अनोखे डिजाइन से किया है। उन्होंने carbon cloth पर polypyrrole-modified और nitrogen-doped titanium dioxide से बना एक flexible photoelectrode तैयार किया है। इस डिजाइन में polymer लेयर और TiO₂ मिलकर बैटरी के अंदर एक internal electric field बनाते हैं, जिससे लाइट से पैदा होने वाले चार्ज जल्दी खत्म नहीं होते है।
आमतौर पर फोटो-इलेक्ट्रोड में यही सबसे बड़ी दिक्कत होती है कि लाइट से बने इलेक्ट्रॉन और होल्स तुरंत आपस में मिल जाते हैं। नई तकनीक में यह समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। नतीजा यह हुआ कि visible light का इस्तेमाल करके सल्फर की redox reactions तेज हो गईं। इससे बैटरी तेजी से चार्ज होती है, ज्यादा पावर देती है और कुछ हद तक सीधे सूरज की रोशनी से चार्ज भी हो जाती है।
परफॉर्मेंस, टेस्टिंग और भविष्य की संभावनाएं
इस नई Lithium–Sulfur बैटरी के टेस्टिंग नतीजे काफी प्रभावशाली हैं। सल्फर रिएक्शन की स्पीड को मापने वाला Tafel slope 122 से घटकर 48 mV प्रति दशक हो गया, जिससे चार्ज ट्रांसफर काफी आसान हो गया। Lithium sulfide बनने की प्रक्रिया भी तेज हुई और बैटरी की क्षमता में करीब 17 प्रतिशत का इजाफा देखा गया। एक डेमो टेस्ट में इस बैटरी से चलने वाली एक टॉय कार ने रोशनी में 288 सेंटीमीटर की दूरी तय की, जबकि अंधेरे में वही कार 212 सेंटीमीटर ही चली।
इसके अलावा दो घंटे की सामान्य धूप में चार्ज होने के बाद कार ने अतिरिक्त 77 सेंटीमीटर दूरी तय की, जिससे यह साबित हुआ कि direct photo-charging वास्तव में काम करता है। लंबे समय के टेस्ट में बैटरी ने 328 चार्ज साइकल के बाद भी 61.7 प्रतिशत क्षमता बनाए रखी। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस flexible photocathode को roll-to-roll तकनीक से बड़े पैमाने पर बनाया जा सकता है। भविष्य में यह तकनीक off-grid एनर्जी सिस्टम, सोलर-असिस्टेड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और हाई-एल्टीट्यूड ड्रोन जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
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