सोलर एनर्जी की दुनिया में Perovskite Solar Cells को लंबे समय से अगली पीढ़ी की क्रांतिकारी तकनीक माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ये पारंपरिक सिलिकॉन सोलर पैनलों की तुलना में सस्ते, हल्के और लचीले होते हैं। इन्हें कम लागत में बनाया जा सकता है और इन्हें अलग-अलग सतहों पर आसानी से लगाया जा सकता है। हालांकि, अब तक Perovskite तकनीक की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी कम उम्र और गर्मी या तेज धूप में जल्दी खराब होना रही है। यही कारण है कि यह तकनीक अभी बड़े पैमाने पर बाजार में नहीं आ पाई थी। लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इस बड़ी समस्या का समाधान खोज लिया है जिससे Perovskite Solar Cells लंबे समय तक टिकाऊ बन सकते हैं।

हीट टेस्ट में शानदार प्रदर्शन, 1100 घंटे बाद भी 95% एफिशिएंसी
यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के प्रोफेसर थॉमस एंथोपोलोस के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने Perovskite Solar Cells को मजबूत और स्थिर बनाने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने Perovskite की सतह पर एक खास तरह की आणविक कोटिंग विकसित की, जिसे amidinium ligands कहा जाता है। यह कोटिंग एक तरह से “मॉलिक्यूलर गोंद” की तरह काम करती है, जो Perovskite की संरचना को मजबूती से जोड़े रखती है।
इस नई तकनीक के साथ बनाए गए सोलर सेल्स ने 85 डिग्री सेल्सियस तापमान पर लगातार 1100 घंटे तक काम करने के बाद भी अपनी 95% से ज्यादा पावर कन्वर्जन एफिशिएंसी बनाए रखी। इतना ही नहीं, इन सोलर सेल्स की कुल एफिशिएंसी 25.4% तक पहुंच गई जो Perovskite तकनीक के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
नई मॉलिक्यूलर कोटिंग कैसे बढ़ा रही है मजबूती और उम्र
इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने यह समझने पर फोकस किया कि amidinium ligand की रासायनिक संरचना Perovskite की ऊपरी परत को कैसे नियंत्रित करती है। यह कोटिंग पारंपरिक तीन-आयामी Perovskite के ऊपर एक लो-डायमेंशनल, अत्यधिक व्यवस्थित लेयर बनाती है। यह परत सोलर सेल को एक सुरक्षात्मक ढाल प्रदान करती है, जिससे सूक्ष्म दरारें और दोष बनने से रुकते हैं। इसका सीधा फायदा यह होता है कि इलेक्ट्रिकल चार्ज आसानी से बह पाता है और सेल गर्मी या तेज रोशनी में जल्दी खराब नहीं होता है। रिसर्च जर्नल Science में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, यह खोज Perovskite Solar Cells की सबसे बड़ी कमजोरी यानी कम उम्र को दूर करने में मदद कर सकती है।
अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर व्यावसायिक रूप से अपनाई जाती है, तो आने वाले वर्षों में सस्ते लेकिन टिकाऊ सोलर पैनल आम लोगों तक पहुंच सकते हैं। इससे न सिर्फ सोलर एनर्जी की लागत कम होगी, बल्कि भारत जैसे देशों में रिन्यूएबल एनर्जी को तेजी से अपनाने में भी मदद मिलेगी। कुल मिलाकर यह खोज सोलर इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकती है जो भविष्य में स्वच्छ और किफायती ऊर्जा का रास्ता खोल देगी।
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