क्या सोलर पैनल ओले झेल पाएंगे? मजबूत टेम्पर्ड ग्लास भी क्यों नहीं है पूरी तरह सेफ, जानिए पूरी डिटेल्स

आज के समय में जब सोलर एनर्जी तेजी से घर-घर पहुंच रही है, तब लोगों के मन में एक बड़ा सवाल उठता है कि क्या सोलर पैनल ओलों जैसी प्राकृतिक आपदाओं को झेल पाने में सक्षम हैं। खासकर जब मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है और अचानक आने वाले तेज तूफान व ओलावृष्टि आम होती जा रही है तो यह चिंता बिल्कुल जायज है। कई लोग मानते हैं कि सोलर पैनल का टेम्पर्ड ग्लास इतना मजबूत होता है कि उसे कुछ नहीं होगा, लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है।

Can solar panels withstand hailstorms

सोलर पैनल की ओलावृष्टि से सुरक्षा कितनी मजबूत होती है

दरअसल, सोलर पैनलों की ओलावृष्टि से सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर टेस्टिंग स्टैंडर्ड तय हैं। क्रिस्टलाइन और थिन-फिल्म सोलर मॉड्यूल्स को IEC 61215 जैसे मानकों के तहत टेस्ट किया जाता है, जिसमें पैनल पर तय साइज और स्पीड से बर्फ के गोले मारकर उनकी मजबूती जांची जाती है। आमतौर पर 25 मिमी व्यास के ओलों को लगभग 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झेलने की क्षमता को स्टैंडर्ड माना जाता है। 

कुछ एडवांस टेस्टिंग में 75 मिमी तक के बड़े ओलों की भी जांच की जाती है। इसके अलावा स्विट्जरलैंड का VKF HW4 जैसे सख्त मानक भी मौजूद हैं, जिन्हें जर्मनी की TÜV Rheinland जैसी संस्थाएं अपनाती हैं। हालांकि, असल जिंदगी में आने वाले ओले कई बार इन सभी मानकों से कहीं ज्यादा बड़े और खतरनाक हो सकते हैं।

टेम्पर्ड ग्लास मजबूत है, लेकिन पूरी तरह अटूट नहीं

सोलर पैनल की सबसे बड़ी सुरक्षा इसकी फ्रंट कवर ग्लास होती है, जिसे टेम्पर्ड ग्लास कहा जाता है। यह सामान्य कांच की तुलना में 4 से 5 गुना ज्यादा मजबूत होता है और इसे खास तकनीक से गर्म करके तुरंत ठंडा किया जाता है। पुराने सोलर पैनलों में आमतौर पर 3.2 मिमी मोटा ग्लास इस्तेमाल होता था, लेकिन लागत और वजन कम करने के लिए कुछ कंपनियां अब पतले ग्लास का भी इस्तेमाल कर रही हैं। कई नए बाइफेशियल और डबल-ग्लास पैनलों में 1.6 मिमी का फ्रंट ग्लास होता है, जिसमें पीछे की तरफ का ग्लास अतिरिक्त मजबूती देता है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि टेस्टिंग में सिर्फ कांच के टूटने को देखा जाता है, लेकिन कांच सही रहने के बावजूद अंदर मौजूद सोलर सेल्स में माइक्रोक्रैक्स आ सकते हैं। ये बेहद छोटे और अक्सर आंखों से न दिखने वाले क्रैक समय के साथ बढ़ते हैं और पैनल की पावर कम कर सकते हैं, हॉटस्पॉट बना सकते हैं और नमी घुसने का खतरा भी बढ़ा सकते हैं।

बदलता मौसम, बड़े ओले और इंश्योरेंस की अहमियत

जलवायु परिवर्तन ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। रिसर्च बताती है कि आने वाले समय में ओलावृष्टि ज्यादा बार और ज्यादा नुकसानदायक हो सकती है। आम तौर पर 25 मिमी का ओला भी नुकसान पहुंचा सकता है, 45 मिमी गोल्फ बॉल जितना बड़ा होता है और 75 मिमी का ओला बेहद खतरनाक माना जाता है। लेकिन कुछ जगहों पर 100 मिमी से भी बड़े ओले देखे गए हैं, जिनसे किसी भी सोलर पैनल के सुरक्षित रहने की उम्मीद करना मुश्किल है।

इसीलिए एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि सोलर सिस्टम लगवाने के बाद अपने होम इंश्योरेंस प्रोवाइडर को इसकी जानकारी जरूर दें और यह कन्फर्म करें कि ओलावृष्टि से होने वाला नुकसान कवर है या नहीं। सही इंश्योरेंस कवर मुश्किल समय में भारी आर्थिक नुकसान से बचा सकता है। कुल मिलाकर, सोलर पैनल मजबूत जरूर हैं, लेकिन प्रकृति के सामने वे भी पूरी तरह अजेय नहीं हैं।

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