दुनिया भर में जब भी सोलर एनर्जी की बात होती है तो सबसे पहले सिलिकॉन सोलर पैनल का नाम लिया जाता है। दशकों से यही तकनीक सोलर इंडस्ट्री पर हावी रही है और लगभग हर देश इसी पर निर्भर करता आया है। लेकिन अब अमेरिका ने एक अलग रास्ता चुना है। अमेरिका 2030 तक कैडमियम टेल्यूराइड यानी Cd-Te थिन फिल्म सोलर टेक्नोलॉजी से 100 गीगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। यह कदम न केवल तकनीकी रूप से बड़ा बदलाव है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

Cd-Te थिन फिल्म सोलर टेक्नोलॉजी क्या है और यह Silicon से कैसे अलग है
Cd-Te सोलर टेक्नोलॉजी पारंपरिक सिलिकॉन सोलर सेल से पूरी तरह अलग है। जहां सिलिकॉन सोलर सेल को बनाने में जटिल फैब्रिकेशन प्रक्रिया, ज्यादा ऊर्जा और समय लगता है, वहीं Cd-Te थिन फिल्म तकनीक अपेक्षाकृत सरल है। इसमें कैडमियम टेल्यूराइड को एक घोल के रूप में कांच की शीट पर फैलाया या उगाया जाता है। इस प्रक्रिया में कम कच्चा माल, कम ऊर्जा और कम लागत की जरूरत होती है। यही वजह है कि इसे लो-कॉस्ट और हाई-वॉल्यूम सोलर मैन्युफैक्चरिंग के लिए बेहतर माना जा रहा है।
अमेरिका में Cd-Te सोलर का इस्तेमाल पहले से ही यूटिलिटी-स्केल प्रोजेक्ट्स में हो रहा है। साल 2023 तक अमेरिका की कुल इंस्टॉल्ड सोलर क्षमता का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा Cd-Te थिन फिल्म से आता था, जबकि दुनिया के बाकी हिस्सों में यह आंकड़ा केवल 3 प्रतिशत के आसपास था। इसकी एक वजह यह भी है कि सिलिकॉन के मुकाबले थिन फिल्म सोलर की कन्वर्जन एफिशिएंसी थोड़ी कम मानी जाती रही है। हालांकि अमेरिका ने घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने और सोलर इंडस्ट्री में विविधता लाने के लिए इस तकनीक पर बड़े पैमाने पर निवेश शुरू किया है।
100 GW के लक्ष्य में सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी की चुनौतियां
2030 तक हर साल 100 गीगावाट Cd-Te सोलर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता हासिल करना आसान नहीं है। इस रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती टेल्यूरियम की सप्लाई है जो Cd-Te का मुख्य घटक है। टेल्यूरियम आमतौर पर तांबे की रिफाइनिंग प्रक्रिया के दौरान उप-उत्पाद के रूप में मिलता है। अमेरिका में इसके सीमित स्रोत हैं और इसी कारण इसे हाल ही में “क्रिटिकल मटेरियल” की सूची में शामिल किया गया है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि मौजूदा एक्सट्रैक्शन टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाकर टेल्यूरियम की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है। इसके साथ-साथ दूसरी बड़ी चुनौती Cd-Te सोलर सेल की एफिशिएंसी बढ़ाने की है। पिछले कुछ वर्षों तक इस क्षेत्र में बहुत बड़ी प्रगति नहीं हुई थी, लेकिन 2023 में इसमें बड़ा ब्रेकथ्रू देखने को मिला। वैज्ञानिकों ने पारंपरिक कॉपर डोपिंग की जगह ग्रुप V एलिमेंट्स जैसे वैनाडियम और नियोबियम का इस्तेमाल शुरू किया, जिससे सेल की स्थिरता और वोल्टेज में सुधार हुआ।
इन प्रयासों का नतीजा यह रहा कि Cd-Te सोलर सेल की एफिशिएंसी में नए रिकॉर्ड बने। First Solar जैसी कंपनियों ने 23.1 प्रतिशत तक की एफिशिएंसी हासिल की जो थिन फिल्म सोलर के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह साफ संकेत है कि Cd-Te तकनीक अब केवल सस्ती नहीं, बल्कि ज्यादा प्रभावी भी बनती जा रही है।
First Solar और अमेरिका का भविष्य का सोलर प्लान
अमेरिका में Cd-Te सोलर क्रांति के केंद्र में ओहायो की कंपनी First Solar है, जिसकी जड़ें यूनिवर्सिटी ऑफ टोलेडो में हुए शोध से जुड़ी हैं। यह कंपनी पिछले 30 वर्षों से अमेरिकी ऊर्जा विभाग के साथ मिलकर काम कर रही है। हाल ही में प्रकाशित एक विस्तृत रोडमैप में बताया गया है कि वैज्ञानिक और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों को कैसे हल करके 100 GW का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
First Solar ने जमीन पर भी तेजी से काम शुरू कर दिया है। लुइसियाना में 1.1 अरब डॉलर की लागत से एक नई 3.5 GW फैक्ट्री शुरू की जा चुकी है और साउथ कैरोलिना में एक और बड़े सोलर प्लांट की योजना बनाई जा रही है। कंपनी का लक्ष्य 2027 तक अमेरिका में अपनी कुल वार्षिक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को लगभग 17.7 GW तक पहुंचाना है।
अब सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में बनने वाली Cd-Te सोलर टेक्नोलॉजी को खरीदेगा कौन। इसका जवाब भी अमेरिका की ऊर्जा रणनीति में छिपा है। यूटिलिटी-स्केल सोलर प्रोजेक्ट्स, घरेलू ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी निर्भरता कम करने की नीति के चलते आने वाले वर्षों में Cd-Te सोलर की मांग तेजी से बढ़ने की पूरी संभावना है। अगर यह योजना सफल होती है तो 2030 तक अमेरिका न केवल सिलिकॉन से आगे निकल जाएगा, बल्कि पूरी दुनिया को एक नया सोलर रास्ता भी दिखा सकता है।
यह भी पढ़े – 👉 सोलर पैनल की गर्मी खत्म! नई Hydrogel Technology से 16°C तक ठंडक और बनेगी 13% ज़्यादा बिजली



