चांदी बनी Solar Industry की सबसे बड़ी दुश्मन? कीमत 3 लाख पहुँचते ही कंपनियाँ Copper की तरफ भागीं!

दुनियाभर में Renewable Energy को बढ़ावा देने वाली Solar Industry आज एक बड़े संकट से जूझ रही है और इसकी सबसे बड़ी वजह बनी है चांदी की रिकॉर्ड तोड़ कीमत। भारत में चांदी का भाव 3 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास पहुँच चुका है, जिसने Solar Panel बनाने वाली कंपनियों की लागत को बुरी तरह हिला दिया है। कुछ साल पहले तक Solar Panel की कुल लागत में चांदी का हिस्सा केवल 3–4 प्रतिशत हुआ करता था, लेकिन अब यह बढ़कर करीब 29 प्रतिशत तक पहुँच गया है। 

solar industry will replace silver with copper

Solar Panels के अंदर Photovoltaic Cells में चांदी की पेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है, जो बिजली को efficiently flow करने में मदद करती है। एक सामान्य Solar Panel में लगभग 15 से 25 ग्राम चांदी लगती है, जो पहले मामूली खर्च थी, लेकिन अब यही खर्च कंपनियों के लिए सिरदर्द बन चुका है। आज अगर एक Solar Panel की कीमत करीब 4,000 रुपये मानी जाए, तो उसमें से लगभग 1,200 रुपये सिर्फ चांदी पर खर्च हो रहे हैं जो दो साल पहले 150–200 रुपये के आसपास था।

Overcapacity और Price War ने बढ़ाया संकट

चांदी की महंगाई ऐसे समय पर आई है, जब Solar Industry पहले से ही Overcapacity और Price War से जूझ रही है। खासतौर पर चीन जो दुनिया की 80 प्रतिशत से ज्यादा Solar Manufacturing क्षमता पर कब्जा रखता है, वहां हालात और भी गंभीर हैं। 2025 तक चीन की Installed Solar Capacity 1.1 Terawatt तक पहुँच गई, जो अमेरिका के पूरे Power Grid के Peak Load से भी ज्यादा है। इतनी तेज़ रफ्तार से Expansion होने के कारण बाजार में Solar Modules की भरमार हो गई, जिससे कीमतों में जबरदस्त गिरावट आई। 

2025 की शुरुआत से ही Solar Module Prices में 30 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ा और 2025 की तीसरी तिमाही में ही चीन की टॉप छह Solar कंपनियों को करीब 2.8 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा। पूरे साल में यह नुकसान 9 अरब डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान लगाया गया। ऐसे माहौल में जब लागत बढ़ रही हो और Selling Price घट रही हो, तब चांदी जैसी महंगी धातु का इस्तेमाल जारी रखना कंपनियों के लिए लगभग नामुमकिन हो गया है।

Copper बना नई उम्मीद, लेकिन चुनौती भी कम नहीं

इसी दबाव के चलते Solar कंपनियाँ अब तेजी से Copper की ओर रुख कर रही हैं। Copper की कीमत चांदी के मुकाबले लगभग 100 गुना कम है और इसकी Electrical Conductivity भी काफी अच्छी मानी जाती है। कई बड़ी कंपनियाँ अब Base-Metal यानी चांदी रहित Solar Cells पर काम कर रही हैं। कुछ कंपनियों ने तो Copper आधारित Solar Cells का Commercial Production शुरू भी कर दिया है, जबकि कई 2026 से बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी में हैं। अनुमान है कि अगर Copper का इस्तेमाल सफल रहा, तो Solar Industry की चांदी पर निर्भरता इस साल करीब 17 प्रतिशत तक कम हो सकती है। 

हालांकि Copper के साथ चुनौतियाँ भी जुड़ी हैं, क्योंकि यह चांदी की तुलना में जल्दी Oxidation का शिकार होता है, जिससे 20–25 साल की Solar Panel Warranty पर सवाल खड़े होते हैं। लेकिन हाल के Research में यह साबित हुआ है कि नई Screen-Printing Technology से बने Copper आधारित Cells की Efficiency चांदी वाले Cells से सिर्फ 1–3 प्रतिशत कम है। Cost Saving के मामले में यह फर्क बेहद अहम है, क्योंकि इससे प्रति Watt लागत में अच्छी-खासी कमी आ सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर Copper Transition सफल रहा, तो Solar Power न सिर्फ सस्ती होगी, बल्कि Global Clean Energy Mission को भी नई रफ्तार मिलेगी। अब सवाल यह नहीं है कि Copper आएगा या नहीं, बल्कि यह है कि Solar Industry इस बदलाव को कितनी तेजी से अपनाती है।

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