Prayagraj बनेगा सोलर सिटी! 2027 तक लगेंगे 1 लाख पैनल, 3kW पर ₹1.08 लाख तक सब्सिडी का बड़ा ऐलान

उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक शहर Prayagraj अब ग्रीन एनर्जी की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। राज्य सरकार ने इस शहर को “सोलर सिटी” के रूप में विकसित करने का लक्ष्य तय किया है और वर्ष 2027 तक यहां 1 लाख सोलर पैनल लगाने का टारगेट रखा गया है। यह पहल न केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि उत्तर प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

Prayagraj will become a solar city

2027 तक 1 लाख सोलर पैनल का लक्ष्य

जिले में अब तक 27,145 सोलर पैनलों के लिए आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और 12,154 पैनल पहले ही लगाए जा चुके हैं। 9 फरवरी तक प्रयागराज में कुल 36,562 किलोवाट सोलर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है, जो इस योजना की सफलता को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी यानी Uttar Pradesh New and Renewable Energy Development Agency के अधिकारियों के अनुसार यह पहल राज्य को बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

राज्य सरकार ने अपने 2026-27 के बजट में ग्रीन एनर्जी को प्राथमिकता देते हुए 2,104 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। सरकार का लक्ष्य 22,000 मेगावाट उत्पादन क्षमता हासिल करना है, जिसके लिए सोलर, बायोएनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जाएगा। वर्तमान में प्रदेश में 2,815 मेगावाट सोलर क्षमता स्थापित हो चुकी है और संगम नगरी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

3kW पर ₹1.08 लाख तक की सब्सिडी

केंद्र सरकार की PM Surya Ghar Yojana के तहत उपभोक्ताओं को आकर्षक सब्सिडी दी जा रही है। 1 किलोवाट के रूफटॉप सिस्टम पर 30,000 रुपये केंद्र और 15,000 रुपये राज्य सरकार की ओर से मिलते हैं, यानी कुल 45,000 रुपये की सब्सिडी मिलती है। 2 किलोवाट सिस्टम पर यह राशि बढ़कर 90,000 रुपये हो जाती है।

यदि कोई उपभोक्ता 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता का सोलर सिस्टम लगाता है, तो उसे 78,000 रुपये केंद्र और 30,000 रुपये राज्य सरकार की ओर से मिलते हैं, यानी कुल 1.08 लाख रुपये तक की सब्सिडी का लाभ मिलता है। यह बड़ी राहत मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है।

आम लोगों को मिल रहा सीधा फायदा

शहर के शहरी क्षेत्रों में इस योजना के प्रति खासा उत्साह देखा जा रहा है। अलका विहार कॉलोनी की निवासी उषा सिंह ने बताया कि बढ़ते बिजली और एलपीजी के खर्च के कारण घर का बजट संभालना मुश्किल हो रहा था, इसलिए उन्होंने 3 किलोवाट का रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाया। इससे उन्हें रोजाना लगभग 10 यूनिट बिजली की बचत हो रही है और इंडक्शन चूल्हे पर खाना बनाने से एलपीजी सिलेंडर का खर्च भी कम हो गया है।

यह योजना केवल सस्ती बिजली उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सोलर पैनल लगाने, मेंटेनेंस और संबंधित सेवाओं में स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

प्रयागराज का सोलर सिटी बनने का सपना अब धीरे-धीरे हकीकत में बदलता दिख रहा है। यदि यही रफ्तार बनी रही, तो 2027 तक 1 लाख सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है और यह मॉडल पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक प्रेरणा बन सकता है।

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