अब बिजली बनेगी और सस्ती! चीन की नई Perovskite खोज से Solar Panel Efficiency पहुंची 31% के पार

चीन के वैज्ञानिकों ने सोलर एनर्जी की दुनिया में एक बड़ी छलांग लगाते हुए ऐसा इनोवेशन किया है, जिससे भविष्य में बिजली और भी सस्ती हो सकती है। अब तक सोलर पैनल की दक्षता यानी एफिशिएंसी बढ़ाने पर दुनियाभर में रिसर्च चल रही थी, लेकिन चीन की नई Perovskite-Silicon Tandem Solar Cell तकनीक ने 31.13% की रिकॉर्ड एफिशिएंसी हासिल कर ली है। 

China Breaks 31 percent Solar Efficiency Barrier

यह उपलब्धि न सिर्फ लैब लेवल पर एक नया बेंचमार्क है, बल्कि आने वाले समय में कम लागत में ज्यादा बिजली उत्पादन का रास्ता भी खोलती है। इस रिसर्च को Northwestern Polytechnical University, Xi’an Shiyou University और Xidian University के वैज्ञानिकों ने मिलकर अंजाम दिया है, जिसने सोलर टेक्नोलॉजी को एक नई दिशा दी है।

Perovskite-Silicon Tandem Solar Cell क्या है और क्यों है खास

Perovskite-Silicon Tandem Solar Cell दरअसल दो अलग-अलग लेयर वाली सोलर सेल होती है, जिसमें ऊपर Perovskite और नीचे Silicon की परत होती है। Silicon सेल पहले से ही बाजार में मौजूद हैं, लेकिन उनकी एफिशिएंसी एक सीमा तक ही बढ़ पाती है। वहीं Perovskite मटेरियल कम लागत वाला है और ज्यादा रोशनी को बिजली में बदलने की क्षमता रखता है। जब इन दोनों को एक साथ जोड़ा जाता है तो सोलर पैनल ज्यादा स्पेक्ट्रम की धूप को इस्तेमाल कर पाता है और एफिशिएंसी काफी बढ़ जाती है।

हालांकि बड़ी चुनौती Wide-Bandgap Perovskite फिल्म की होती है, जिसमें क्रिस्टलाइजेशन और फेज सेपरेशन की समस्या आती है। यही वजह थी कि लंबे समय से इस टेक्नोलॉजी को कमर्शियल लेवल तक ले जाना मुश्किल हो रहा था।

2D Seeding Agent से कैसे टूटी एफिशिएंसी की दीवार

चीन के वैज्ञानिकों ने इस समस्या का समाधान 2D CsPb2Br5 नाम के एक खास Seeding Agent से किया है। यह एक ऑल-इनऑर्गेनिक टू-डायमेंशनल मटेरियल है, जिसे Perovskite फिल्म के ऊपर इस्तेमाल किया गया। इसका काम Perovskite क्रिस्टल को कंट्रोल्ड तरीके से ऊपर से नीचे की ओर ग्रो करने में मदद करना है।

इस तकनीक से रैंडम क्रिस्टल बनने की समस्या खत्म हो गई और डिफेक्ट्स भी कम हुए। नतीजा यह हुआ कि चार्ज ट्रांसपोर्ट बेहतर हुआ और Fill Factor 85.39% तक पहुंच गया, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इसी वजह से Wide-Bandgap Perovskite सेल की परफॉर्मेंस में जबरदस्त सुधार देखने को मिला। एक सिंगल-जंक्शन सेल में भी इस तकनीक से 20.14% की पावर कन्वर्जन एफिशिएंसी हासिल की गई।

31% से ज्यादा एफिशिएंसी का मतलब आम लोगों के लिए क्या है

Perovskite-Silicon Tandem डिवाइस ने 31.13% की एफिशिएंसी और 30.81% की स्टेबल पावर आउटपुट हासिल की है, जो मौजूदा कंट्रोल डिवाइस से कहीं बेहतर है। इतना ही नहीं, ऑल-Perovskite Tandem सेल ने भी 28% से ज्यादा की एफिशिएंसी दिखाई है।

स्टेबिलिटी के मामले में भी यह टेक्नोलॉजी आगे निकली है, क्योंकि बिना कवर किए गए सेल्स ने लंबे समय तक अपनी 80% परफॉर्मेंस बनाए रखी। इसका सीधा मतलब है कि भविष्य में ऐसे सोलर पैनल ज्यादा टिकाऊ और भरोसेमंद होंगे।
आम उपभोक्ताओं के लिए इसका फायदा यह है कि कम एरिया में ज्यादा बिजली बनेगी, सोलर सिस्टम की लागत घटेगी और ग्रीन एनर्जी को अपनाना और आसान होगा।

अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर कमर्शियल हो जाती है तो आने वाले वर्षों में सोलर पैनल सस्ते होंगे और बिजली के बिल पर भी बड़ा असर पड़ेगा। चीन की यह Perovskite खोज साफ संकेत देती है कि सोलर एनर्जी का भविष्य पहले से कहीं ज्यादा उज्ज्वल और किफायती होने वाला है।

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